कश्मीर डायरी- प्रथम भाग



कश्मीर एक जन्नत ,अगर मैं अपने दिल की बात कहूं तो कश्मीर वाकई में धरती पर जन्नत है ! कश्मीर बहुत खूबसूरत है ! मुझको तारीख तो याद नहीं लेकिन यह मेरा पहला वाकिया था कि मैं कश्मीर जा रहा था ! मैं देवबंद का रहने वाला हूं ! देवबंद से शालीमार ट्रेन जम्मू तक जाती है ! मैं भी इसी ट्रेन से जम्मू तक गया ! वहां से कश्मीर लगभग 300 किलोमीटर दूर है ! यह 300 किलोमीटर का रास्ता हमने एक Tavera गाड़ी से पूरा किया ! थका देने वाला सफर था ! हमको लगभग पूरा दिन लग गया , हम काफी थक चुके थे ,लेकिन जैसे-जैसे हम कश्मीर की तरफ बढ़ रहे थे कश्मीर की खूबसूरती देखकर थकान मानो भाग सी गई थी ! जैसे हम श्रीनगर पहुंचे हमने देखा गाड़ी वाला हमारा दोस्त बन चुका है ! वह हमसे बोल रहा था कि कश्मीर आए हो पूरा घूम कर जाना बहुत सुंदर है ! उसने हमको अपना नंबर भी दिया कि जब वापस जाओ तो मेरी ही गाड़ी से चलना ! हमने भी उसका नंबर सहेज कर रख लिया क्योंकि उसके साथ हम को सफर करने में काफी मजा आया था ! वह हमको छोड़कर चला गया अब हम को वहां पर एक होटल ढूंढना था ! हमको वहां पर एक डल झील के पास एक छोटा सा होटल मिला जिसका मालिक काफी अच्छी स्वभाव का था ! उसने हमको थर्ड फ्लोर पर एक कमरा दिया जो  एक ठीक-ठाक रूम था ! पहले दिन हमने बस आराम किया अगले दिन हम को अपने काम पर जाना था ! मैं वहां पर रिलायंस जियो के प्रोजेक्ट में गया हुआ था और मुझको लगभग कश्मीर के चप्पे-चप्पे पर जाना पड़ता था ! जो बंदा हमारी साथ जाता था मैं उसको  जिंदगी भर नहीं भूल सकता ! उसका स्वभाव बहुत बढ़िया था , मेरी अभी भी उससे बात होती है उसका नाम अर्शिद था ! कश्मीर के मेरे अनुभव को पढ़ने के लिए आपको इस ब्लॉग सीरीज को पूरा पढ़े

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